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अभी यमुना नहीं बल्कि पिलर करेंगे हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा का निर्धारण

अभी यमुना नहीं बल्कि पिलर करेंगे हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा का निर्धारण

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हर साल बरसात के मौसम में हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बीच सीमा विवाद उठता रहता है लेकिन हरियाणा के फरीदाबाद जिले में 25 किलोमीटर की यमुना की लंबाई में आने वाले दिनों में हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बीच सीमा का कोई विवाद नहीं होगा। यमुना बरसात के मौसम में अपनी धारा को बदल लेती है जिस कारण यह विवाद होता है, लेकिन अब हरियाणा और उत्तर प्रदेश 1970 के दशक में आए दीक्षित अवार्ड के आधार पर अपनी सीमाएं तय कर रहे हैं। इसके लिए यमुना में पिलर लगाने का काम शुरू हो गया है। लगभग एक तिहाई पिलर लग भी चुके हैं और बाकी पिलर भी जल्दी लगा दिए जाएंगे।

फरीदाबाद में यमुना नदी के साथ लगते हरियाणा और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में करीब पांच दशकों से चला आ रहा सीमा विवाद अब स्थायी समाधान की ओर बढ़ गया है। इसके लिए दोनों राज्यों की सीमा को स्पष्ट करने के लिए यमुना किनारे मजबूत बॉर्डर पिलर लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। अब तक 100 पिलर लगाए जा चुके हैं।
अधिकारियों के अनुसार इन पिलरों को खास डिजाइन के तहत तैयार किया जा रहा है। प्रत्येक पिलर की ऊंचाई करीब 70 फीट रखी गई है। इनमें से लगभग 50 फीट हिस्सा जमीन के अंदर रहेगा, जबकि 20 फीट हिस्सा जमीन के ऊपर दिखाई देगा। इससे बाढ़ और कटाव के बावजूद पिलर सुरक्षित रह सकेंगे। पिलर स्थापित होने के बाद सीमा पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। इससे किसानों के बीच जमीन और फसलों को लेकर होने वाले विवाद खत्म होंगे और दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चला आ रहा टकराव भी समाप्त होगा। साथ ही, सीमावर्ती इलाकों में शांति और प्रशासनिक स्पष्टता कायम हो सकेगी।

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लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार फरीदाबाद सीमा में 40 और पिलर लगाए जाएंगे। यह पिलर गांव बसंतपुर से लेकर मंझावली तक स्थापित किए जा रहे हैं। यमुना हरियाणा और यूपी के बीच प्राकृतिक सीमा का काम करती है, लेकिन बारिश के मौसम में यही नदी दोनों राज्यों के लिए विवाद की वजह बन जाती है। बरसात के दौरान यमुना का जलस्तर बढ़ने से उसकी धारा बदल जाती है। धारा बदलने के चलते कभी हरियाणा की जमीन यूपी की ओर चली जाती है तो कभी यूपी की जमीन हरियाणा के हिस्से में आ जाती है। इसी जमीन पर खेती और कब्जे को लेकर हर साल दोनों राज्यों के किसानों के बीच टकराव की स्थिति बनती रही है। वहीं हर साल दोनों राज्यों के राजस्व विभाग जमीन की पैमाइश कराते हैं, लेकिन यह समाधान केवल अस्थायी होता है। कुछ समय बाद विवाद फिर खड़ा हो जाता है। यह समस्या सिर्फ फरीदाबाद जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि यमुना से सटे पूरे हरियाणा क्षेत्र में लंबे समय से बनी हुई है।

 

लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) अधिकारियों के अनुसार, 1970 के दशक में आए दीक्षित अवॉर्ड के आधार पर यमुना किनारे हरियाणा और यूपी की सीमा तय की गई थी। उस समय सीमा चिन्हित करने के लिए पिलर भी लगाए गए थे, लेकिन यमुना के तेज बहाव और कटाव के कारण वे पिलर समय के साथ बह गए। मौजूदा समय में कुछ ही स्थानों पर पुराने पिलर बचे हुए हैं, जो सीमा निर्धारण के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए सर्वे ऑफ इंडिया से इंटर स्टेट बॉर्डर का विस्तृत सर्वे कराया गया। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर अब यमुना के साथ-साथ दोनों राज्यों की सीमा पर नए पिलर खड़े किए जा रहे हैं। हरियाणा सरकार ने पहले करनाल में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया था। वहां सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद अब फरीदाबाद समेत अन्य सीमावर्ती जिलों में भी इस योजना को अमल में लाया जा रहा है।

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फरीदाबाद जिले में यमुना नदी की लंबाई करीब 25 किलोमीटर है। इस पूरे हिस्से में हरियाणा और यूपी के लगभग 52 गांव बसे हुए हैं। सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा की गई निशानदेही के अनुसार ही पिलर लगाए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी तरह का भ्रम या विवाद न रहे।
पीडब्ल्यूडी, फरीदाबाद के कार्यकारी अभियंता प्रकाश लाल ने बताया कि ‘पिलर निर्माण का कार्य इवन-ऑड सिस्टम के आधार पर किया जा रहा है। यानी एक पिलर हरियाणा की ओर से बनाया जा रहा है, तो अगला पिलर यूपी की ओर से तैयार होगा। हरियाणा की तरफ से करीब 150 पिलर बनाए जाएंगे और उतने ही पिलर उत्तर प्रदेश की ओर से लगाए जाएंगे।
फरीदाबाद में पिलर लगाने के काम के बाद यह प्रक्रिया पूरे हरियाणा में चलाई जाएगी ताकि पूरे हरियाणा से उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सीमा का विवाद पूरी तरह से खत्म हो सके। हरियाणा-यूपी सीमा का अधिकांश हिस्सा, लगभग 200 किमी, यमुना नदी से बनता है, जिसमें यमुनानगर, पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद और पलवल जैसे जिले शामिल हैं। अब फरीदाबाद में सीमा का निर्धारण हो जाएगा इसके बाद करीब 175 किलोमीटर लंबी और सीमा पर पिलर लगाने का काम शुरू किया जाएगा।

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